Gopal Gupta

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दीवार मेरे भाई उठाने में लग गए

टोटा था रोटी दाल  जुटाने में लग गए,
घर के बड़े थे हम सो कमाने में लग गए,,

उस ने लगाई आग थी घर में ऐ दोस्तो,
हम थे कि घर की आग बुझाने में लग गए,,

इक पल में तोड़ कर वो गये ख़्वाब का महल,
सालो जिसे है हम को बनाने में लग गए,,

मै कामयाब हूँ ये पता मुझ को तब चला,
जब लोग गल्तियों को गिनाने में लग गए,,

हद से बढ़ा जो दर्द तो आया हुनर हमे,
हम शायरी सभी  को सुनाने में लग गए,,

गुजरा नहीं था  दौर अभी ठीक से मेरा,
पहचान मेरी लोग भुलाने में लग गए,,

भरता रहा दरार में रिश्तों कि हर तरह,
दीवार मेरे भाई उठाने में लग गए,,

Gopal Gupta" Gopal"

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6 Comments

बेहतरीन अभिव्यक्ति

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Alka jain

26-Dec-2023 07:09 PM

Nice one

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Milind salve

26-Dec-2023 06:47 PM

Nice

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